Tuesday, November 29, 2016

हुए दुनिया से बेगाने हम जिनके इक इशारे पर


सजाए  मौत  का तोहफा  हमने पा लिया  जिनसे 

ना जाने क्यों बो अब हमसे कफ़न उधार दिलाने  की बात करते हैं 

हुए दुनिया से  बेगाने हम जिनके इक  इशारे पर 
ना जाने क्यों बो अब हमसे ज़माने की बात करते हैं

दर्दे दिल मिला उनसे बो हमको प्यारा ही लगता
जख्मो पर बो हमसे अब मरहम लगाने की बात करते हैं

हमेशा साथ चलने की दिलासा हमको दी जिसने
बीते कल को हमसे बो अब चुराने की बात करते हैं

नजरें  जब मिली उनसे तो चर्चा हो गयी अपनी 
न जाने क्यों बो अब हमसे प्यार छुपाने की बात करते हैं

हुए दुनिया से  बेगाने हम जिनके इक  इशारे पर 
 
 
मदन मोहन सक्सेना

Tuesday, October 20, 2015

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